हरिद्वार। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पुलिस ने नकली नोट छापकर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से करीब 50 हजार रुपये के छपे जाली नोट, लैपटॉप, दो प्रिंटर, मोबाइल फोन तथा नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, 27 जून 2026 को कोतवाली श्यामपुर पुलिस ने 52,500 के नकली नोटों के साथ तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था। मामले की गहन विवेचना और पूछताछ के दौरान कई अहम सुराग मिले, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। इसी क्रम में पुलिस को सूचना मिली कि कुछ लोग क्विड कार यूके 08 बीजी 6798 से नकली नोट छापने के उपकरण और तैयार जाली नोटों को ठिकाने लगाने के लिए बड़ापुर (बिजनौर) की ओर जा रहे हैं।

सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लालढांग तिराहे पर घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया और तलाशी के दौरान तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि गिरोह का सदस्य गुलजार ऑनलाइन विशेष कागज मंगाता था। शगुन जोशी असली नोटों की फोटो लेकर सॉफ्टवेयर और एप की मदद से उनकी गुणवत्ता बढ़ाता था, ताकि प्रिंट हूबहू असली जैसा दिखाई दे। वहीं देवेन्द्र ने बताया कि वह पहले भी गुलजार के साथ मिलकर बिजनौर के बड़ापुर क्षेत्र में करीब एक लाख रुपये के नकली नोट छाप चुका है, जिनमें से लगभग 60 हजार रुपये के नोट बाजार में चला दिए गए थे।

इस सफलता के बाद गिरोह का लालच बढ़ा और उन्होंने अपने नेटवर्क में देवेन्द्र के जीजा शिवम को भी शामिल कर लिया। चारों मिलकर नकली नोट तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने की साजिश रच रहे थे। पुलिस ने आरोपितों के पास से एक लैपटॉप व चार्जर, प्रिंटर, पांच मोबाइल फोन, 500 के चार असली नोट, 500 के नकली नोटों की 25 प्रिंटेड शीट (करीब 50 हजार मूल्य), गांधीजी के वॉटरमार्क वाली एक शीट बरामद की है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उनका चालान कर दिया है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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